Saturday, March 28, 2015

जाने स्वच्छ भारत अभियान को भारत में कैसे सफल किया जा रहा है और उसका हिस्सा बने (ENGLISH )

मुह बंद काम चालू



नीचे दिए लिंक द्वारा इस अभियान से जुड़ कर सफाई अभियान को "भारत में " सफल बनाने का सही तरीका सीखें
https://www.facebook.com/theugl.yindian

Sunday, December 14, 2014

एंड्राइड मोबाइल में हिंदी में टाइप करने कर तरीका | How to type in Hindi in Android mobile phone

एंड्राइड फोन में हिंदी में टाइप करने का step by step तरीका
1. Android phone में Google play में जा कर google hindi input नामक सॉफ्टवेयर डाउनलोड करे व् इनस्टॉल करे

2. settings -->language & input   --> spellchecker को सेलेक्ट करे

3. settings -->language & input   --> Default में google hindi input  को सेलेक्ट करे

4. अब google hindi input के सामने के तीन लाइन वाले छोटे से बटन कोक्लिच्क करे। इस से आप input setting में आ जायेंगे --> english prediction को सेलेक्ट करे

5.ध्यान रहे auto spellcheck को सेलेक्ट नहीं करना

6. अब whatsup या sms में मेसेज लिखना शरू करे।

7. आपको कीबोर्ड दिखने लगेगा। यहाँ स्पेस बार (लम्बा वाला बटन ) के लेफ्ट साइड में a=अ नामक एक बटन दिखाई देगा। इसका मतलब सारी सेटिंग सही से हो चुकी है।

8. जब हिन्दी में लिखना हो तो इस बटन को दबाये। और bharat टाइप करे। ये अपने आप हिंदी में भारत टाइप कर देगा। जब इंग्लिश में टाइप करना हो तो a=अ नामक  बटन फिर से दबाएँ

visit www.DharmYuddh.com


Friday, September 6, 2013

विदेशो में जमा कालाधन : हिंदुत्व के लिए सबसे बड़ा खतरा

विदेशो में जमा कालाधन : हिंदुत्व के लिए सबसे बड़ा खतरा , इसे भारत वापस लाना ही होगा नहीं भारत बरबाद हो जायेगा .

हिंदुत्व को सबसे बड़ा खतरा हिन्दू विरोधी ताकतों से है जिन्हें की विदेशो में जमा कालेधन से पोसा ज़ा रहा है-----

१-विदेशो में जमा कालाधन मिशनरियो को मुहैया कराया ज़ा रहा जो हिन्दुओ को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रलोभन के रूप में किया ज़ा रहा. यह कालाधन हमारा  अपना ही धन है जो हमारे खिलाफ प्रयोग हो रहा है.

२-कालाधन उन हिंदुत्व विरोधी देशो को मात्र १-१.५% व्याज पर दिया ज़ा रहा है. जो इसे आतंकियों और मिशनरियो को अनुदान के रूप में दे रहे हैं.

३-यही कालाधन भारत को ऊँचे दर पर कर्ज के रूप में दिया ज़ा रहा है और उन कर्जदाताओ की शर्त पर हम अपना प्राकृतिक संसाधन विदेशी कंपनियों को कौड़ियो के भाव बेंच दे रहे है और ये दुश्मन और पैसा कमाकर भारत को बरबाद कर देंगे. इस समय १२१ करोड़ भारतीयों पर प्रति व्यक्ति ३८८००/- कर्जा है. यह कर्जा निपटने के नाम पर सरकार सरकारी संस्थानों को विदेशियों को बेच देगी.

४-इस कालेधन के प्रभाव में हमारे बीके हुए नेता किसी भी हिंदुत्व विरोधी कानून को तुरंत पास कर देते है जैसे- हिन्दू अंधश्रद्धा कानून,  लक्षित हिंसा विधेयक, 

५-कालाधन भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने में किया ज़ा रहा है जिसमे ९८% हिन्दू ही मरते है भारत में आज तक आतंकवाद में इसाइयों की मौत नगण्य है.

६-भारत में ईसाई बाहुल्य  इलाको में आतंकवाद के नाम पर सिर्फ हिन्दुओ का क़त्ल किया जाता  है और आतंकवाद के नाम पर सरकार इसे हिन्दुओ का नाम मिटने में प्रयोग कर रही है. उत्तर पूर्व में हिन्दू दिनों दिन गायब होते ज़ा रहे है.

७-भारत में अधिकतर कालाधन इन्ही हिन्दू विरोधियो का है जिसे खदानों और योजना-व्यापार के पैसे से लूटा गया है.

८-यदि आप सोनिया के "राष्ट्रीय सलाहकार परिषद्" के सदस्यों की लिस्ट देखे तो आप पाएंगे की इसमे सभी के सभी हिन्दू मूल्यों का विरोध करते है जो हमेशा ही हिंदुत्व विरोधी नियम कानून, अध्यादेश, सलाह, कमिटी, नियुक्तिया आते रहेते है. सोनिया मंडली में सभी लोग हिन्दू नामो वाले मुस्लिम और इसाई हैं.

९-भारत में ४०० लाख करोड़ का कालाधन भारत को हमेशा ही गुलाम बनाये रखने केलिए काफी है जैसे की  इसी में से थोडा सा पैसा  खर्च  करके विदेशी कंपनियों को भारत को लुटाने की खुली छुट मिली हुई है जो की हर साल भारत से २० लाख करोड़ लुट रहे है जो हमारे देश की कुटीर उद्योग को बंद कराकर हमको गुलाम बना दे रही है.

१०-भारत में स्कुलो में पाठ्यक्रम सिर्फ इसी कालेधन के भरोसे ही बदल करके हमारे बच्चो का दिमाग गुलामी की तरफ ले ज़ा रहे है. शिक्षा पर पहले ही माफिया का कब्ज़ा हो चूका है.

११-भारत में २०००० लाख करोड़ की सम्पदा को लुट लुट कर विदेश में जमा किया ज़ा रहा और गरीबो पर धौंस जमाया ज़ा रहा है, जनता सोचती है की हमारा क्या ज़ा रहा है यदि कोयला में सिर्फ मन्होहन के कार्यकाल में २६ लाख करोड़ का लुट मचा है.आज बाजार में १२/- किलो बिकने वाला कोयला १० पैसे किलो पर लुटा दिया गया. इसमे भी कालेधन का खेल हुआ.

१२-पेट्रोलियम में कालेधन का खेल तो पुरे भारत वासिओ का होश उड़ा देगी जब यह खुलकर सामने आयेगा 

क्योकि भारतीयता और हिंदुत्व में  ज्यादा फर्क नहीं है और भारत में रहेने वाले ९९.९९% भारतीयों के पूर्वज हिन्दू रहे है जिससे उनके जीवन में हर कदम पर हिंदुत्व का दर्शन होता. हिंदुत्व को ये बर्बाद नहीं करा रहे है, हिंदुत्व को .०१% भारतीय और विदेशो में हमारे दुश्मन ही हिंदुत्व को बरबाद करने पर तुले हुए है जिसके लिए हराम के कालेधन का बखूबी इस्तेमाल किया ज़ा रहा है और कांग्रेस सरकार इसमे अपना अहम् रोल अदा करा रही है.

इसलिए भारत की लुट के इस कालाधन को वापस लाना बहुत जरुरी है, परन्तु कालाधन को लाने में हिंदुत्व विरोधी ताकतों को कोई रूचि नहीं है न टीवी वालो को, न कांग्रेस सरकार को. हर भारतीय  को या तो कालेधन के अभियान को सहयोग करना चाहिय नहीं तो विरोध-चुपचाप कतई नहीं बैठे.

Flip Side of Mahatma Gandhi




 
 
 
Reasons for killing Mahatma Gandhi:
 
During the trial justice Khosla had allowed Nathuram Godse
the killer of Gandhi to read his own confession in the court.
 
 
 
 
 
However the Indian government had banned the confession of Nathuram.
 
 
Nathuram's brother Gopal Godse fought a 60 years legal battle
after which the Supreme Court removed the ban.
 
 
 
Gopal Godse
 
 
Nathuram had given 150 reasons for killing Gandhi; 
some of which are as follows:
 
1. In 1919 people of India
wanted General Dyer to be tried for
the Massacre of innocent people at Jalianwalla Baugh .
 
Gandhi refused to support this demand.
 
 
 
2. Whole of India wanted Gandhi to intervene and save
Bhagat Singh,Rajguru and Sukhdev from the Gallows.
 
Gandhi stubbornly refused on the grounds
that they were misguided freedom fighters,
and theirs was an act of  violence.
 
 
 
 
3. On 6th May 1946 on public platform, Gandhi asked 
Hindus to sacrifice and not fight the members of Muslim league.
 
In Kerala Muslim league members killed over 1500 Hindus and converted
2000  to Islam. Instead of protesting Gandhi expressed that it was a brave
act of Allah's followers.
 
4. On several occasions Gandhi called Shivaji, Maha Rana pratap
and Guru Govind Singh as misguided nationalists.
 
5. Gandhi advised Raja Harisingh of Kashmir to abdicate 
as Kashmir had Muslim majority ,and settle down in Kashi.
 
 
Raja Harisingh
 
 
 
on the other hand he supported the Nizam (Osman Ali Khan )
of Hyderabad to join Pakistan , even though the state of Hyderabad
(Andhra , Telangana ,Karnataka and Berar) had Hundu majority.
 
Nizam Osman Ali Khan
 
 
Sardar Vallabh bhai Patel however over ruled Gandhi .
When Nehru heard of Patel's police action in Hyderabad
(operation POLO) he disconnected his telephone with Patel.
 
 
Nizam surrendering to Patel
 
 
6. In 1931 the congress committee on designing of
Indian flag suggested that the flag be only in saffron.
Gandhi insisted changed it to a tri-colour flag.
 
7. During the Tripura congress , Subhash Chandra Bose
was elected as president with majority however Gandhi
supported Pattabhai Sitaramayya forcing Bose to resign.
 
8. On 15th June 1947 during congress conclave it was decided to
resist the partition of India but Gandhi went to the meeting at the
last minute and supported the partition.
 
Infact it was Gandhi who had declared earlier that partition
will take place only over my dead body.
 
 
 
 
Patel and Nehru
 
 
9. Sardar Patel was elected by majority as the
first Prime Minister but Gandhi insisted on Nehru .
 
10. Nehru government had decided to reconstruct Somnath Mandir
at its cost but Gandhi without even being a member of the ministry
forced the Govt. to reject this proposal .
 
 
At the same time on 13th January 1948 he went on a fast to
allow Muslims to repair the mosque in Delhi at govt's cost.
 
11. When Hindus refugees returned to India after partition,
some of them took shelter  in some mosques temporarily .
When Muslims objected ,Gandhi forced all such Hindus children,
ladies and the old to leave the mosque and live on the streets.
 
12. In October 1947 Pakistan attacked Kashmir ,
Gandhi went on a fast and forced the Indian Govt
to pay Pakistan a compensation of Rs.55 crore.
 
Gandhi did not mind hurting Hindu feelings
to win over the Indian Muslims.
 
 
Nathuram Godse and Narayan Apte
were hanged on 15th November 1949
in the Ambala Jail in Punjab.

गो -हत्या का अर्थशाश्त्र

गो -हत्या का अर्थशाश्त्र : इसे बंद करना इतना आसान नहीं होगा जब एक पशु कटने से 34000 रुपये का मुनाफा  मिलने लगे--


भारत में गाय का मांस 120/- रुपये किलो खुलेआम बिक रहा है और एक गाय-भैंस-बैल को कटने पर 350  किलो  मांस निकलता है. चमड़े और हड्डियों की अलग से कीमत मिलती है. जो पशु औसतन 8000- 9000 में गाव मिल जा रहे हैं और सुखा वाले प्रदेशो में तो यह 3000/- में ही मिल जा  रहे हैं.

पशु की कीमत 8000/-
उसे काटने से मिला मांस 350 किलो
भारत में उस मांस का दाम = 350 x 120/- = 42,000/- रुपये 
चमड़े का दाम = 1000/-
विदेशो में निर्यात करने पर यही मांस 3 से 4 गुना दाम में बिकता है और यह निर्भर करता है की आप किस देश में भेज रहे हैं.
किसान को मिला सिर्फ 9000/- रुपया 
और गो-हत्या शाळा चलाने वाले  को मिला 43000 - 9000 = 34,000/- रुपये 
भारत में एक एक गो-वधशाला में 10000 से 15000 पशु रोज कट रहे हैं औसत 12000 पशु रोज का मानिए तो --
यानी एक मालिक को एक दिन में 34000/-  x 12000  =  40,80,00,000/-  (चालीस करोड़ रुपये रोज का मुनाफा)
यदि साल में 320 दिन यह काम चले तो 40 करोड़  x 320 = 12800 करोड़ रुपये शुद्ध मुनाफा सालाना,

तो सोचिये गाय का कत्लखाना चलाने  वाला इसे क्यों बंद करेगा चाहे वह हिन्दू ही क्यों न हो. कपिल सिब्बल की पत्नी का भी यही व्यापार है यह मुनाफा तब है जब मांस भारत में बेचा जाए परन्तु निर्यात करने पर यह मुनाफा तीन गुना हो जाता है यानि हर कत्लखाने का मालिक हर साल 12800 x 3 = 38,400 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफ़ा हर साल.
(यह गणना आप अपने हिसाब से स्वयम भी करे शायद कुछ अंतर आये कीमत में )

अब आप 250/- रुपये दिहाड़ी कमाने वाले इन ख़रबपतियों का क्या कर पायेंगे..इसीलिए इस काम को सिर्फ सरकार ही रोक सकती है 

यानी गाय को कटने से रोकने के लिए आपको सरकार ही बदलनी पड़ेगी.

और इस काम के लिए "नरेन्द्र मोदी" से अच्छा विकल्प भला कौन होगा जिसे बाबा और स्वामी का समर्थन मिल रहा हो.

जय भारत 

कांग्रेस की आभाव नीति

कांग्रेस की आभाव नीति : नौकरी वाले की वेतन बढोत्तरी और बेरोजगार को नौकरी नहीं – विदेशी कंपनियों के 3 गुने महगे उत्पादों के  लिए उपभोक्ता तैयार करने की गहरी साजिश....


अंग्रेजो की नीति थे की आभाव पैदा करो और लोगो का दोहन करो...कम लोगो नौकरी देकर उन्हें ज्यादा लाभ देकर नौकरी से चिपकाकर गुलाम बनाये रखिये जिससे वे लाभ पाते रहने के लिए अंग्रेजो के लिए अपने ही भाइयो की हत्या करने से न हिचकिचाएं..

ठीक यही नीति सरकार 65 सालो से पनाए हुए है.  भारत में 20 करोड सक्षम युवा पूर्णकालिक बेरोजगार है जो 8000 से 15000 की भी नौकरी करने के लिए लालायित है लेकिन अंग्रेजो की नीति पर चलते हुए पहले ही नौकरी कर रहे लोगो और  लाभ- और लाभ देते जा रहे है और उनकी श्रेष्ठता के हिसाब से काम भी नहीं हो रहा है.

हफ्ते में 6 क्लास लेने वाले अध्यापक लोगो को  65000/- से 95000/- तक की वेतन दिया जा रहा है, यही हाल हर जगह है  और उन्हें बार वेतन वृद्धि भी दी जा रही है, हाल में केंद्र के  7000 करोड सालाना वृद्धि से 10000 हजार रुपये महीने वाली 583000,  (7000x10000000/ (12 months x 10,000/-PM) = 583333  jobs यानी  5,83,333 नयी नौकरिया दी जा सकती थे और बुजुर्ग लोगो के सिर पर काम का भार कम किया जा सकता था और जनता के काम में आसानी और तेजी आती लेकिन ....

.....इस हरामखोरी के पीछे एक और दवाब विदेशियों की तरफ से है की समाज में एक ऐसा पैसे वाला तबका पैदा किया जाना  चाहिए जो विदेशी कंपनियों का माल तीन गुने दाम में खरीदने में न हिचकिचाए....10000/- और 15000/- वाले तो अपना पेट ही पालने में लगे रहेंगे, 95000/ की टीवी, 10 लाख की कार, 55000/- की मोबाइल, 8500/- का जूता, माल में शाप्पिंग, और अन्य विदेशी फर्नीचर कौन खरीदेगा. सरकार सबको नौकरी देकर नौकरी पेशा वालो को आमजन के श्रेणी में नहीं रखना चाहती है..

.सरकार को मालूम है धुप में जलने वाले किसान की औसत् आय मात्र 2050/- महीना है जो चप्पल भी दिल्ली मेड प्लास्टिक का ही खरीदेगा.......तो इटालियन मार्बल लगाने का दम रखने वालो की एक जमात इन्ही की कीमत पर पैदा करना होगा......और खूब बढ़िया तनख्वाह देकर इनको जन सेवक नहीं जनता के साहब बना दिया जाये जिससे इनसे किसी भी समय जन विरोधी काम कराये जा सके. ज्ञात हो कांग्रेस के विदेशी दोस्त भारत में सबसे पुरानी तकनीक 3 गुना दाम में बेचते हैं,,....अभी अभी हाल में एफ डी आई की अनुमति के पीछे यही विदेशी ईसाई दोस्त है जो भारतीय गुलामो का तेल निकालने की तैयारी कर रहे है....

सरकार का यदि नौकरी देने का मंशा होती तो हमारे मेधावी वैज्ञानिको की टीम को अनुसंधान में लगा कर हर चीज भारत में ही बनाकर हर हाथ को काम दे सकती थी लेकिन ये ठहरे नेहरू की औलाद जिन्हें सिर्फ विदेशी पसंद हैं... किराना में एफ डी आई से 4.4 करोड लोग और पैदल होने वाले हैं जब की 5000 हजार विदेशी कम्पनिय पहले से ही 26 लाख करोड का बिजिनेस करके करीब 16 लाख करोड का मुनाफा हर साल विदेश ले जा रही है तो भारत के लोगो को रोजगार कहा से मिलेगा....और रुपये का अवमूल्यन हो रहा है...खुदरा किराना में एफ डी आई आने से 23 लाख करोड रूपया और बाहर जायेगा तब रुपया कितना निचे जायेगा, क्या नीच कांग्रेसियों को इसका अंदाजा भी है?

सरकार को संतुलित वेतन देकर उसी कोष 30% अतिरक्त लोगो को नौकरी दी जा सकती है और सेवानिवृत्त की उम्र 62-60 से घटाकर 58 साल करके 14% और लोगो नौकरी दी जा सकती है.

लेकिन यह सोचेगा कौन???   सरकारे तो सेवक नहीं साहब पैदा करने में लगी हैं..????
जय भारत  

HISTORY OF RIOTS - दंगो का इतिहास


Riot 1: 1947 Communal riots in Bengal | 5000-10000 Killed |
Ruling party happened to be Congress

Riot 2: 1969 | Communal riots in Ahmedabad | More than 512 Killed in the city. 3000 to 15000 range in the entire state | Riots for 6 months]
 Ruling party happened to be Congress

Riot 3: Oct 1984 | Communal riots in Delhi | 2733 Killed |
Ruling  party Congress | Almost 100% casualty were Sikhs, which was Rajiv Gandhi led genocide on India's minorities | Followed by “Big Tree falls” justification too from the Prime Minister!

Riot 4: Feb 1983 | Communal violence in Nellie, Assam | 2000-5000
killed | PM – Indira Gandhi (Congress party) - India's worst slaughter of Muslims in any single riot (just 6 HOURS)

Riot 5: 1964 Communal riots in Rourkela & Jamshedpur | 2000 Killed |
Ruling party Congress

Riot 6: August 1980 | Moradabad Communal riots | Approx 2000 Killed |
Ruling Party Congress

Riot 7: October 1989 | Bhagalpur, Bihar riots | 800 to 2000 killed |
Ruling party Congress

Riot 8: Dec 1992 - Jan 1993 | Mumbai, Maharashtra riots | 800 to 2000
killed | Ruling party Congress

Riot 9: April 1985 | Communal riots in Ahmedabad, Gujarat | At least
300 Killed | Ruling party Congress

Riot 10: Dec 1992 | Aligarh, UP | At least 176 killed |
Ruling party Congress (President's rule)

Riot 11: December 1992 | Surat, Gujarat | At least 175 killed |
Ruling party Congress

Riot 12: December 1990 | Hyderabad, AP | At least 132 killed |
Ruling party Congress

Riot 13: August 1967 | 200 Killed | Communal riots in Ranchi |
Party ruling again Congress

Riot 14: April 1979 | Communal riots in Jamshedpur, West Bengal | More
than 125 killed | Ruling party CPIM (Communist Party)

Riot 15: 1970 | Bhiwandi communal riots in Maharashtra | Around 80
killed |Ruling party Congress

Riot 16: May 1984 | Communal riots in Bhiwandi | 146 Killed, 611 Injured  |
Ruling party Congress | CM – Vasandada Patil*

Riot 17: Apr-May 1987 | Communal violence in Meerut, UP | 81 killed |
Ruling party Congress

Riot 18: July 1986 | Communal violence in Ahmedabad, Gujarat | 59
Killed | Ruling party Congress

Why are
we so obsessed with just 2002 Gujarat riots? So what's it - lets be honest,

Do we have problem with riots or with Modi? And Media Led by  the puppets of Congress which leaves no stone unturned in maligning the image of Modi but no time for major issues of society.